कभी-कभी पहाड़ों में हिमस्खमलन सिर्फ एक ज़ोरदार आवाज़ से ही शुरू हो जाता है

Tuesday, January 31, 2017

भूखा, नंगा ठिठुरता गणतंत्र!

हमें आज़ादी मिले 70 साल हो चुके हैं लेकिन आज़ादी के इतने साल बाद भी हाल ही में जारी हुयी ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार देश की 58% सम्पत्ति देश के महज 1% लोगों के कब्जे में है! बजट घाटे की दुहाई देकर तमाम पूंजीवादी सरकारें स्वास्थ्य, चिकित्सा व शिक्षा पर अपना खर्च लगातार कम करती जा रही हैं और उस पैसे को विजय माल्याओं, अडाणीयों, अंबानीयों जैसे लुटेरों की झोलीयों में डाला जा रहा है। 6 लाख करोड़ से ज्यादा का सरकारी बैंकों का पैसा ये चंद बड़े पूंजीपति ही डकार गये! ये आज़ादी वो आज़ादी नहीं है जिसका सपना शहीदेआज़म भगत सिंह और उनके साथियों ने देखा था। आज हमें उनसे प्रेरणा लेते हुये एक नये समतामूलक समाज को बनाने के लिये संघर्ष शुरु करना पड़ेगा क्योंकि जब तक लूट, अन्याय और गैर-बराबरी पर टिका यह सामाजिक ढाँचा बना रहेगा तब तक देश की जनता की ज़िन्दगी में कोई बदलाव नहीं आने वाला है।









Sunday, January 15, 2017

साथियों

कुछ अपरिहार्य कारणों से व कुछ अन्‍य व्‍यस्‍तताओं के कारण आवेग का प्रकाशन कुछ समय के लिये स्‍थगित कर दिया गया था किंतु जनवरी 2017 से आवेग पत्रिका को दुबारा शुरू  किया जा रहा है। अब से यह दीवार पत्रिका नियमित प्रकाशित की जायेगी।


सधन्‍यवाद
आवेग टीम

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